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Uttarakhand News- आस्था की यात्राः पावन कैलाश मानसरोवर यात्रा के पहले दल को हरी झंडी दिखाकर CM धामी ने किया रवाना, बोले- यह केवल धार्मिक नहीं, आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रीय समरसता का प्रतीक….

देहरादून. उत्तराखण्ड से संचालित पावन कैलाश मानसरोवर यात्रा का शुभारंभ आज टनकपुर से हुआ. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शारदा पर्यटक आवास गृह से कैलाश मानसरोवर यात्रा के प्रथम दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और सभी श्रद्धालुओं की मंगलमय एवं सफल यात्रा की कामना की. उन्होंने सभी श्रद्धालुओं का रुद्राक्ष की माला और भगवान शिव का पटका पहनाकर स्वागत किया और उनसे आत्मीय संवाद भी किया.

मुख्यमंत्री ने कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रीय समरसता का प्रतीक है. भगवान भोलेनाथ की कृपा से ही श्रद्धालु को इस पवित्र यात्रा का अवसर प्राप्त होता है. यात्रा के दौरान आने वाली प्रत्येक चुनौती का सामना श्रद्धा और धैर्य के साथ करना चाहिए, क्योंकि शिव में अटूट विश्वास ही सभी कठिनाइयों को सरल बना देता है.

उन्होंने कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा सीमांत क्षेत्रों के लिए विकास और समृद्धि का माध्यम भी है. यह यात्रा सीमांत गांवों की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और स्थानीय जीवन से देशभर के लोगों को जोड़ती है. मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं से स्थानीय हस्तशिल्प एवं उत्पादों की खरीद कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाने का आह्वान किया.

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में सनातन संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए ऐतिहासिक कार्य किए जा रहे हैं. देश भर में प्राचीन मंदिरों का पुनरुद्धार एवं सौंदर्यीकरण किया जा रहा है, जिससे भारत की आध्यात्मिक विरासत को नई पहचान मिल रही है.

श्रद्धालुओं ने भी राज्य सरकार द्वारा की गई उत्कृष्ट व्यवस्थाओं की सराहना की. सातवीं बार कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे श्रद्धालु अनिल कुमार जैन सहित अन्य सभी यात्रियों ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड सरकार द्वारा यात्रियों की सुविधा एवं सुरक्षा के लिए बेहतर प्रबंध किए गए हैं.

शनिवार सायंकाल टनकपुर पहुंचे प्रथम दल का देवभूमि की परंपरा के अनुरूप छोलिया नृत्य, पुष्पवर्षा, फूल-मालाओं एवं भव्य स्वागत के साथ अभिनंदन किया गया. श्रद्धालुओं के लिए सांस्कृतिक संध्या का आयोजन भी किया गया, जिसमें उत्तराखण्ड की समृद्ध लोक संस्कृति एवं लोक कलाओं की आकर्षक प्रस्तुतियां दी गईं.

शारदा पर्यटक आवास गृह के प्रबंधक मनोज कुमार ने बताया कि प्रथम दल में चिकित्सक सहित कुल 49 तीर्थयात्री शामिल हैं, जिनमें 34 पुरुष एवं 15 महिला श्रद्धालु हैं. दल में आंध्र प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड के श्रद्धालु सम्मिलित हैं, जो भारत की सांस्कृतिक विविधता एवं राष्ट्रीय एकता का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करते हैं.

दल के साथ तमिलनाडु के डॉ. अरुण कुमार चिकित्सक के रूप में शामिल हैं. राजस्थान के 68 वर्षीय पुरुषोत्तम खंडेलवाल दल के सबसे वरिष्ठ तीर्थयात्री हैं, जबकि गुजरात के 21 वर्षीय हरिकृष्णा सबसे युवा श्रद्धालु हैं. यह यात्रा सभी आयु वर्ग के लोगों की भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था का प्रतीक है.

हर-हर महादेव एवं बम-बम भोले के जयघोष से गुंजायमान टनकपुर में प्रथम दल के प्रस्थान के साथ ही पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण रहा. देवभूमि उत्तराखण्ड ने एक बार फिर अपनी समृद्ध संस्कृति, परंपरा एवं अतिथि सत्कार की अनुपम मिसाल प्रस्तुत की.

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विशेष प्रयासों से लगातार दूसरे वर्ष कैलाश मानसरोवर यात्रा का संचालन टनकपुर मार्ग से किया जा रहा है. इससे सीमांत जनपद चम्पावत को धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान मिली है और स्थानीय व्यापार, पर्यटन, परिवहन, होटल व्यवसाय एवं रोजगार के अवसरों को भी उल्लेखनीय बढ़ावा मिल रहा है.

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