Homeदेशनारायणपुर जिला प्रशासन की अनूठी पहल- दुर्गम वनांचल गांवों तक ट्रैक्टर से...

नारायणपुर जिला प्रशासन की अनूठी पहल- दुर्गम वनांचल गांवों तक ट्रैक्टर से पहुंचाया गया, 3 माह का राशन, 151 परिवारों को मिली बड़ी राहत…..

रायपुर: छत्तीसगढ़ के दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत खाद्यान्न और पोषण सामग्री पहुंचाने के लिए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा विशेष रणनीतियां लागू की गई हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश है कि राज्य के पहुच विहीन क्षेत्रों में वर्षा व भौगोलिक बाधाओं को पार करने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर राशन दुकानें खोलना, ट्रैक्टर के माध्यम से डोर-स्टेप डिलीवरी और मॉनसून से पहले तीन महीने का अग्रिम राशन भंडारण करने के निेर्दश दिए हैं।

मुख्यमंत्री के निर्देश के परिपालन में नारायणपुर जिले के दूरस्थ और दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों तक सार्वजनिक वितरण प्रणाली का लाभ समय पर पहुंचाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने एक विशेष और सराहनीय पहल की है। बारिश के मौसम और कठिन रास्तों को देखते हुए प्रशासन ने ट्रैक्टरों के माध्यम से अंदरूनी गांवों तक तीन माह का खाद्यान्न सुरक्षित पहुंचाया है। कलेक्टर नम्रता जैन के निर्देशन में जिला मुख्यालय से लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित छह गांवों मुरुमवाड़ा, गुडेकोर, दिवालूर, धोबे, बोटेर और हरबेल के राशनकार्डधारी हितग्राहियों को जुलाई, अगस्त और सितम्बर माह का राशन एक साथ वितरित किया गया।

6 गांवों के 151 परिवारों को मिला लाभ

खाद्य विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार भौगोलिक रूप से बेहद दुर्गम क्षेत्रों में बसे कुल 151 राशनकार्डधारी परिवारों को उनकी निर्धारित मात्रा में तीन महीने का खाद्यान्न उपलब्ध कराया गया है। लाभान्वित गांवों और परिवारों में मुरुमवाड़ा के 98 परिवार, दिवालूर के 32 परिवार, गुडेकोर के 13 परिवार, धोबे के 03 परिवार, हरबेल के 03 परिवार, बोटेर के 02 परिवार शामिल हैं।

बारिश और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों को दी मात

इन वनांचल गांव घने जंगलों, कच्चे रास्तों और नदी-नालों से घिरे होने के कारण सामान्य दिनों में भी परिवहन के लिहाज से बेहद चुनौतीपूर्ण माने जाते हैं। बरसात के दिनों में स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है, जिससे ग्रामीणों को राशन के लिए कई किलोमीटर की पैदल और जोखिमभरी यात्रा करनी पड़ती थी। इस समस्या को भांपते हुए जिला प्रशासन ने मानसून के दौरान राशन सामग्री को सीधे ट्रैक्टर के जरिए गांवों तक भिजवाया, जिससे ग्रामीणों को अपने घर के पास ही राशन मिल गया।

बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगों को मिली बड़ी राहत

खाद्यान्न वितरण की पूरी प्रक्रिया स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग के कर्मचारियों की मौजूदगी में अत्यंत पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराई गई। गांव में ही राशन मिलने पर खुशी जाहिर करते हुए स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि इस पहल से उनके समय और श्रम दोनों की बचत हुई है। विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग हितग्राहियों के लिए यह व्यवस्था किसी वरदान से कम नहीं रही, क्योंकि उन्हें अब राशन के लिए कठिन रास्तों से होकर नहीं गुजरना पड़ा।

अंतिम छोर के व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना लक्ष्य

इस संबंध में जिला प्रशासन का कहना है कि उनका मुख्य उद्देश्य जिले के अंतिम छोर पर बसे प्रत्येक पात्र और जरूरतमंद परिवार तक शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाना है। इसके लिए दुर्गम क्षेत्रों में विशेष परिवहन व्यवस्था की कार्ययोजना पर लगातार काम किया जा रहा है। प्रशासन की इस मुस्तैदी ने यह साबित कर दिया है कि भौगोलिक कठिनाइयां भी जनता तक उनका हक पहुंचाने में बाधा नहीं बन सकतीं।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments