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पड़ोसी किसानों की सफलता से बढ़ा भरोसा, पहली बार नैनो यूरिया और नैनो डीएपी अपनाएंगे समयलाल….

रायपुर: छत्तीसगढ़ में आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रति किसानों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। पारंपरिक उर्वरकों के साथ अब नैनो उर्वरकों का उपयोग भी ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के मनेंद्रगढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम चैनपुर के किसान समयलाल ने इस खरीफ सीजन में पहली बार अपनी फसल में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उपयोग करने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि पड़ोसी किसानों के सकारात्मक अनुभवों ने उन्हें नई तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित किया।

समयलाल प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति से नैनो उर्वरक लेने पहुंचे। उन्होंने बताया कि पिछले खरीफ सीजन में गांव और आसपास के कई किसानों ने नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी का प्रयोग किया था। उनकी फसलों की बेहतर बढ़वार, हरियाली और संतोषजनक उत्पादन देखने के बाद उनका भी इन उर्वरकों पर विश्वास बढ़ा।
समयलाल ने कहा कि खेती में नई तकनीकों को अपनाना समय की जरूरत है। उनका मानना है कि नैनो उर्वरकों के उपयोग से कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे उनकी फसल की गुणवत्ता और उपज दोनों में सुधार होगा।

उन्होंने नैनो उर्वरकों की आसान उपलब्धता और उपयोग को भी इसकी बड़ी विशेषता बताया। उनके अनुसार जहां पारंपरिक उर्वरकों की भारी बोरियों को खेत तक पहुंचाना श्रमसाध्य होता है, वहीं नैनो यूरिया और नैनो डीएपी की छोटी बोतलों को आसानी से खेत तक ले जाया जा सकता है। इससे किसानों का समय, श्रम और परिवहन लागत तीनों कम होती हैं।

कृषि विभाग किसानों को नैनो उर्वरकों के संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग के लिए लगातार प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध करा रहा है। विभाग का उद्देश्य आधुनिक कृषि तकनीकों के माध्यम से उत्पादन बढ़ाना, लागत घटाना और किसानों की आय में वृद्धि करना है।

समयलाल का कहना है कि यदि किसान वैज्ञानिक सलाह के अनुरूप नई तकनीकों को अपनाएं तो खेती अधिक लाभकारी और टिकाऊ बन सकती है। उनका मानना है कि एक किसान की सफलता दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा बनती है और यही बदलाव कृषि क्षेत्र में नवाचार को गति देता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ता यह रुझान संकेत दे रहा है कि आधुनिक तकनीकों के प्रति किसानों का विश्वास मजबूत हो रहा है और खेती को अधिक किफायती, उत्पादक तथा टिकाऊ बनाने की दिशा में यह बदलाव महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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