Homeदेशएक विचार और कार्यशैली की यात्रा गुजरात से विकसित भारत तक—संकल्प, निर्णय...

एक विचार और कार्यशैली की यात्रा गुजरात से विकसित भारत तक—संकल्प, निर्णय और जनभागीदारी

नरेंद्र मोदी के सरकार के शीर्ष नेतृत्व में 25 वर्ष केवल एक राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि एक विकसित होती शासन-दृष्टि और कार्यशैली का परिचय हैं। 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शुरू हुई यह यात्रा आज विकसित भारत 2047 के संकल्प तक पहुँच चुकी है।

गुजरात में जल संकट, सूखा और क्षेत्रीय असमानताओं जैसी चुनौतियों के बीच जल-संरक्षण, सिंचाई, कृषि, बिजली और बुनियादी ढाँचे को प्राथमिकता दी गई। SWAGAT जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से तकनीक, निगरानी और जवाबदेही को प्रशासन का हिस्सा बनाया गया।

प्रधानमंत्री बनने के बाद यही सोच राष्ट्रीय स्तर पर जनधन, उज्ज्वला, स्वच्छ भारत, आवास, आयुष्मान भारत और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं में दिखाई दी। लक्ष्य रहा कि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे और नागरिक के जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो।

डिजिटल इंडिया, UPI और DBT ने तकनीक को शासन का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया, वहीं Make in India और आत्मनिर्भर भारत ने भारत को वैश्विक विनिर्माण और नवाचार का केंद्र बनाने की दिशा में प्रयासों को गति दी।

GST, अनुच्छेद 370 से संबंधित संवैधानिक परिवर्तन, नई शिक्षा नीति और महिला आरक्षण जैसे निर्णयों ने राष्ट्रीय नीति-विमर्श को प्रभावित किया। इन पर समर्थन और आलोचना दोनों हुए, लेकिन कठिन विषयों पर निर्णय लेने की प्रवृत्ति मोदी की कार्यशैली की प्रमुख पहचान बनी।

अब लक्ष्य विकसित भारत 2047 है—एक ऐसा भारत जो आर्थिक रूप से मजबूत होने के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, महिला भागीदारी, कृषि, तकनीक और नवाचार में भी सक्षम हो।

25 वर्ष पीछे देखने का अवसर हैं, लेकिन 2047 आगे देखने का संकल्प है। नेतृत्व दिशा दे सकता है, लेकिन विकसित भारत का निर्माण जनता की सामूहिक भागीदारी से ही होगा।

संकल्प से सिद्धि तक की यात्रा जारी है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments