Homeदेशभारत पर अभी नहीं लगा 100% टैरिफ! रूस प्रतिबंध कानून से फिर...

भारत पर अभी नहीं लगा 100% टैरिफ! रूस प्रतिबंध कानून से फिर क्यों बढ़ा खतरा?

वाशिंगटन 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने  ऐतिहासिक 'लिंडसे ओ ग्राहम सेंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026' पर हस्ताक्षर कर इसे कानूनी रूप दे दिया है। इस कानून के सामने आते ही वैश्विक शेयर और कमोडिटी बाजारों में हलचल मच गई है।

मीडिया में यह सुर्खियां तैर रही हैं कि वॉशिंगटन अब रूस से कच्चा तेल और नेचुरल गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक का भारी-भरकम दंडात्मक टैरिफ लगाने जा रहा है। हालांकि, अगर इस नए कानून की बारीकियों और कानूनी प्रावधानों को समझें, तो तस्वीर कुछ अलग ही नजर आती है।

'अधिकार मिलना' और 'लागू करना'- दो अलग बातें
अमेरिकी संसद ने व्हाइट हाउस को रूसी ऊर्जा खरीदारों पर लगाम कसने के लिए नया कानूनी अधिकार दे दिया है। लेकिन कानून में इसका प्रावधान ऐसा रखा गया है जो राष्ट्रपति को तुरंत फैसला लेने के बजाय कूटनीतिक सौदेबाजी की पूरी छूट देता है।

0 से 100% की फ्लेक्सिबल रेट: कानून में यह अनिवार्य नहीं है कि ट्रंप तुरंत 100% ही टैरिफ थोप दें। यह दर शून्य से लेकर 100 प्रतिशत के बीच कुछ भी रखी जा सकती है।

30 दिनों की मोहलत: कानून लागू होने के बाद व्हाइट हाउस के पास 30 दिनों का समय होगा, जिसके बाद ही यह समीक्षा की जाएगी कि किन देशों ने रूसी ऊर्जा की नई खरीद की है।

'टॉप-5' खरीदारों की समीक्षा: अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) हर 180 दिनों में दुनिया के उन 5 सबसे बड़े देशों की लिस्ट की समीक्षा करेगा जो रूस से सबसे ज्यादा तेल और गैस आयात करते हैं।

राष्ट्रपति के पास 'राष्ट्रीय हित' में छूट देने का वीटो अधिकार
इस कानून की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें राष्ट्रपति को असीमित विवेकाधिकार दिए गए हैं।

अगर ट्रंप प्रशासन को लगता है कि किसी देश पर टैरिफ लगाने से अमेरिकी अर्थव्यवस्था या उसके रणनीतिक गठबंधनों को नुकसान पहुंचेगा, तो राष्ट्रपति इस टैरिफ को टाल या पूरी तरह माफ भी कर सकते हैं।

अगर कोई देश धीरे-धीरे रूसी तेल पर अपनी निर्भरता कम कर रहा है, तो उस पर टैरिफ की दरों को घटाया भी जा सकता है।

अमेरिका की तरफ से भारतीय सामानों पर तुरंत भारी-भरकम टैरिफ न लगाने के पीछे तीन प्रमुख आर्थिक और रणनीतिक कारण हैं:

अमेरिका में महंगाई बढ़ने का डर: भारत से अमेरिका जाने वाले उपभोक्ता सामानों पर 100% ड्यूटी लगाने से खुद अमेरिकी जनता के लिए दैनिक चीजें बेहद महंगी हो जाएंगी, जिससे अमेरिका में महंगाई बेकाबू हो सकती है।

द्विपक्षीय व्यापार समझौता: नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच इस समय एक व्यापक व्यापार समझौते पर संवेदनशील बातचीत चल रही है। यह नया कानून अमेरिकी मेज पर बातचीत का पलड़ा भारी करने का एक औजार है, न कि तुरंत चलाया जाने वाला हथौड़ा।

वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप: अगर भारतीय रिफाइनरियों की क्षमता को अचानक विश्व बाजार से काट दिया जाता है, तो पूरे यूरोप और एशिया में पेट्रोल-डीजल की भारी किल्लत हो जाएगी, जिससे क्रूड की कीमतें आसमान छूने लगेंगी।

क्या है भारत का रुख?
विदेश मंत्रालय ने इस कानून के बनने के बाद दोहराया है कि भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता 1.4 अरब नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

मंत्रालय का कहना है कि भारत बाजार की स्थितियों के हिसाब से अलग-अलग देशों से तेल खरीदता रहेगा और देश के आर्थिक और व्यापारिक हितों को सुरक्षित रखने के लिए हर जरूरी कानूनी और कूटनीतिक कदम उठाए जाएंगे।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments