Homeदेशपत्र सूचना कार्यालय, भोपाल के नेतृत्व में जम्मू पहुंचे पत्रकारों के दल...

पत्र सूचना कार्यालय, भोपाल के नेतृत्व में जम्मू पहुंचे पत्रकारों के दल ने रियासी में दुनिया के सबसे ऊंचे चिनाब रेल आर्च ब्रिज और अंजी ब्रिज का अवलोकन किया

जम्मू 

प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) के  नेतृत्व में जम्मू पहुंचे भोपाल के पत्रकारों के दल ने आज रियासी में  दुनिया के सबसे ऊंचे चेनाब रेलवे आर्च ब्रिज और अंजी रेल पुल का दौरा किया।  रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा  पत्रकार दल  को इन अधोसंरचना परियोजनाओं की इंजीनियरिंग खूबियों, सुरक्षा प्रणालियों और तकनीकी विशेषताओं के बारे में जानकारी दी गई।चिनाब रेल ब्रिज के दौरे के दौरान, सीनियर इंजीनियर श्री सुपरीत सिंह राणा ने मीडियाकर्मियों को पुल की बनावट और इंजीनियरिंग से जुड़ी खासियतों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि चिनाब ब्रिज दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज है, जो नदी के तल से लेकर फॉर्मेशन लेवल तक 359 मीटर की ऊंचाई पर बना है। इस पुल की कुल लंबाई 1,315 मीटर है और इसकी अनुमानित उम्र (कोडल लाइफ) 120 साल है।

इससे पहले, प्रतिनिधिमंडल ने अंजी रेल ब्रिज का दौरा किया, जहाँ सीनियर इंजीनियर सुपरीत सिंह राणा ने मीडिया टीम को इसके डिज़ाइन और तकनीकी विशेषताओं के बारे में जानकारी दी। अंजी ब्रिज भारतीय रेलवे का पहला केबल-स्टे रेलवे ब्रिज है। इस  की कुल लंबाई 725 मीटर है और यह पानी के स्तर से लगभग 331 मीटर की ऊँचाई पर बना है।

दोनों रेलवे पुलों के दौरे के दौरान नॉर्दर्न रेलवे की सीनियर पीआरओ सुश्री निधि पांडे भी मौजूद थीं। वे पूरे दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल के साथ रहीं और मीडियाकर्मियों को इन दोनो अधोसंरचना परियोजनाओं से से जुड़ी विभिन्न तकनीकी, ऑपरेशनल और प्रशासनिक पहलुओं के बारे में जानकारी दी।

मीडिया का दल सलाल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर स्टेशन भी पहुँचा। सलाल हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के जनरल मैनेजर संजय कुमार जैन ने मीडियाकर्मियों को बांध के तकनीकी और कामकाज से जुड़े पहलुओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सलाल बांध, जम्मू-कश्मीर के रियासी ज़िले में चिनाब नदी पर बना एक 'रन-ऑफ-द-रिवर' हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट है। नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (एनएचपीसी) द्वारा संचालित इस पावर स्टेशन की कुल क्षमता 690 मेगावाट  है। श्री जैन ने इस प्रोजेक्ट के ऐतिहासिक महत्व पर ज़ोर देते हुए बताया कि इसका पहला चरण 1987 में और दूसरा चरण 1993 से 1995 के बीच अलग-अलग चरणों में शुरू किया गया था। यह पावर स्टेशन स्वच्छ ऊर्जा का एक अहम स्रोत है और नॉर्दर्न ग्रिड के लिए हर साल 3082 मिलियन kWh बिजली पैदा करने का लक्ष्य पूरा करता है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments