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राज्य स्थापना दिवस पर विशेष : छत्तीसगढ़ के 26 वर्ष- संघर्ष, संकल्प और सर्वांगीण विकास की स्वर्णिम गाथा…

रायपुर: एक नवंबर 2000 को मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ भारत का 26वां राज्य बना था। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के दूरदर्शी नेतृत्व में यह सपना साकार हुआ था। 1 नवंबर 2000 को जब मध्य प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ एक नए राज्य के रूप में मानचित्र पर आया था, तब संसाधनों की कमी, प्रशासनिक चुनौतियों और पिछड़ेपन के बीच एक भविष्य गढ़ने की चुनौती सामने थी। आज अपनी स्थापना के 26 गौरवशाली वर्ष पूरे करते हुए छत्तीसगढ़ ने विकास के क्षेत्र में जो मील के पत्थर स्थापित किए हैं, वे न केवल प्रेरणादायक हैं, बल्कि यह दर्शाते हैं कि दृढ़ इच्छाशक्ति और जनसहभागिता से किसी भी राज्य की तकदीर कैसे बदली जा सकती है।

बजट और अर्थव्यवस्था में ऐतिहासिक छलांग

राज्य के गठन के शुरुआती दौर में सीमित वित्तीय संसाधनों के साथ करीब 7,000-8,000 करोड़ रुपये से शुरू हुआ छत्तीसगढ़ का बजट आज बढ़कर 1.72 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। यह इस बात का प्रमाण है कि राज्य की आर्थिकी तेजी से मजबूत हुई है। देश के ‘धान के कटोरे’ के रूप में पहचाना जाने वाला यह प्रदेश आज अपनी खनिज संपदा (कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट), इस्पात, सीमेंट और ऊर्जा उत्पादन के बूते देश के औद्योगिक नक्शे पर एक मजबूत स्तंभ बन चुका है। वैश्विक निवेश और आधुनिक उद्योगों के विस्तार से राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है।

महिला सशक्तिकरण

महिला सशक्तिकरण साय सरकार की प्रमुख पहचान के रूप में उभरा है। महतारी वंदन योजना की 31 किस्तों में लगभग 68 लाख पात्र महिलाओं को 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि सीधे खातों में दी जा चुकी है। प्रदेश में 13.85 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। बिहान मिशन में प्रदेश के 31 लाख से अधिक गरीब परिवारों की महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़ी हैं। महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के लिए संपत्ति की रजिस्ट्री में पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत और स्टाम्प शुल्क में एक प्रतिशत की रियायत दी गई है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ताकत हमारे किसान

प्रधानमंत्री आवास (ग्रामीण) में अब तक 24.40 लाख आवास स्वीकृत हो चुके हैं। प्रदेश में औसतन करीब 1,600 आवास प्रतिदिन पूरे किए जा रहे हैं। ढाई वर्षों में पुराने और नए स्वीकृत आवास मिलाकर 11 लाख से अधिक घर लाभार्थियों को सौंपे जा चुके हैं। किसानों को 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से  धान बेचने की सुविधा दी गई। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 25.24 लाख किसानों से 141.04 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया। समर्थन मूल्य और कृषक उन्नति योजना को मिलाकर किसानों को लगभग 43,723 करोड़ रुपए की राशि दी गई। खरीदी व्यवस्था में ऑनलाइन टोकन, बायोमेट्रिक सत्यापन और रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसे सुधार किसानों के लिए काफी सुविधाजनक रहे।

बस्तर संभाग के दूरस्थ, दुर्गम और जनजातीय क्षेत्रों में सड़क संपर्क के विस्तार की दिशा में केंद्र सरकार से महत्वपूर्ण उपलब्धि मिली है। बस्तर की 485 बसाहटों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए स्वीकृति मिल चुकी है, वहीं 280 अन्य बसाहटों को बारहमासी सड़कों से जोड़ने के लिए 804.06 करोड़ रुपए की लागत के 263 सड़क कार्यों के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। बस्तर में नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक अभियान के साथ विकास की गति को तेज करने तथा दूरस्थ गांवों को मुख्यधारा से जोड़ने के राज्य सरकार के प्रयासों को केंद्र सरकार का सहयोग मिल रहा है।
आधारभूत संरचना और संपर्क का विस्तार

बीते ढाई दशकों में छत्तीसगढ़ के बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व बदलाव आया है। गांवों को पक्की सड़कों से जोड़ने (ग्रामीण सड़क नेटवर्क में लगभग 98 गुना वृद्धि) से लेकर राजधानी रायपुर और नवा रायपुर (अटल नगर) जैसी आधुनिक शहरी बसाहट ने राज्य के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है। दूर-दराज के आदिवासी और वन अंचलों तक बिजली, पानी, पक्की सड़कें और डिजिटल कनेक्टिविटी (मोबाइल व इंटरनेट) पहुंच चुकी है, जिससे गांवों और शहरों के बीच की दूरियां सिमटी हैं। नवा रायपुर में डाटा सेंटर और आधुनिक तकनीक परियोजनाएं नई अर्थव्यवस्था से जुड़ रही हैं। सरकार सुशासन, वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत कर रही है।  छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास का केंद्र रोजगार सृजन और युवाओं के लिए अवसरों का विस्तार है। प्रदेश की प्राकृतिक संपदा, कृषि उत्पादन और बेहतर अधोसंरचना निवेश के लिए अनुकूल आधार प्रदान करते हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, टेक्सटाइल और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ ने 450 से अधिक ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधार लागू किए हैं। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट 2026 लाने वाला राज्य देश का पहला राज्य बना। जन विश्वास सुधारों के जरिए 279 छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया। वन-क्लिक सिंगल विंडो व्यवस्था, सरल भूमि डायवर्जन और रजिस्ट्री के बाद स्वतः नामांतरण जैसे सुधार किए गए हैं। नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के बाद 8 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनसे 1.72लाख से अधिक संभावित रोजगार के अवसर निर्मित होंगे।

शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास

मानव संसाधन विकास के बिना किसी भी राज्य की तरक्की अधूरी है। पिछले 26 वर्षों में इस दिशा में भी क्रांतिकारी कार्य हुए हैं। राज्य में साक्षरता दर बढ़कर करीब 79 प्रतिशत  तक पहुंच गई है। स्वास्थ्य सुविधाओं का दायरा बढ़ाते हुए जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों की संख्या में कई गुना इजाफा हुआ है, जिससे आम जनता को घर के नजदीक बेहतर इलाज मिलने लगा है। इसके अलावा, ‘बिहान’ योजना जैसी पहलों के माध्यम से राज्य की लाखों महिलाओं (स्व-सहायता समूहों) को आजीविका और आर्थिक स्वावलंबन से जोड़कर समाज की मुख्यधारा में मजबूती से स्थापित किया गया है।

मेडिकल कॉलेजों की संख्या में इजाफा

राजधानी रायपुर के नवा रायपुर क्षेत्र में मेडिसिटी हब विकसित किया जा रहा है, जिसमें 5,000 बिस्तरों वाला सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल स्थापित करने की योजना है। रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा) में 700 बिस्तरों का अस्पताल तथा प्रदेश में 4 नए मेडिकल कॉलेजों का विस्तार किया जा रहा है। राज्य में शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजना, श्री धन्वंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर योजना, दाई दीदी मोबाइल क्लीनिक योजना, और बच्चों के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) जैसी योजनाएं संचालित हो रही हैं।

“स्वस्थ छत्तीसगढ़”की परिकल्पना हो रहा है साकार

मुख्यमंत्री  श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि चिकित्सा सेवाओं के विस्तार को गति प्रदान करते हुए गुणवत्तापूर्ण उपचार की उपलब्धता दूरस्थ क्षेत्रों तक सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण एवं सेवाओं की पहुंच में सुधार के माध्यम से “स्वस्थ छत्तीसगढ़” की परिकल्पना को साकार किया जा रहा है, जो “विकसित छत्तीसगढ़” के लक्ष्य की प्राप्ति का आधार बनेगा। आज प्रदेश में आईआईएम, आईआईटी, ट्रिपल आईटी, एनआईटी, एम्स, लॉ यूनिवर्सिटी जैसी कई बड़ी संस्थाएं खुल गई हैं. इसके अलावा स्कूली शिक्षा में भी काफी विकास हुआ है हालांकि अभी इस दिशा में और काम करने की आवश्यकता है

सुरक्षा, शांति और बस्तर की नई सुबह

छत्तीसगढ़ के विकास मार्ग में सबसे बड़ी बाधा रहे नक्सलवाद के खिलाफ पिछले कुछ वर्षों में निर्णायक और प्रभावी कदम उठाए गए हैं। सुरक्षा बलों के साहस, दूरदराज के क्षेत्रों में नए सुरक्षा शिविरों की स्थापना और साथ ही वहां शिक्षा, स्वास्थ्य व विकास योजनाओं के पहुंचने से लाल आतंक का दायरा तेजी से सिमटा है। बस्तर और सरगुजा के संवेदनहीन समझे जाने वाले कई इलाकों में अब विकास की किरणें पहुंच रही हैं, जिससे वहां के नागरिकों के जीवन में एक नया सवेरा और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित हो रहा है।

संस्कृति और आधुनिकता का अनूठा संगम

छत्तीसगढ़ ने अपनी आधुनिक विकास यात्रा के दौरान अपनी सांस्कृतिक जड़ों और आदिवासी धरोहर को पूरी सहेजकर रखा है। बस्तर की लोक संस्कृति, कर्मा-सुआ नृत्य, पारंपरिक त्यौहार और छत्तीसगढ़ी भाषा-खानपान आज देश-दुनिया में अपनी अनूठी पहचान बना चुके हैं। डिजिटल माध्यमों और मेलों (जैसे राज्योत्सव) के जरिए स्थानीय कला और शिल्प को वैश्विक मंच मिल रहा है।   धान का कटोरा कहे जाने वाले इस राज्य ने अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, बस्तरिया परंपरा, हरेली, सिरपुर के इतिहास और लोककला को सहेजते हुए आधुनिक तकनीक और औद्योगिक क्षेत्र में नई पहचान बनाई है।

शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय  का निर्माण नवा रायपुर (अटल नगर) में किया गया है। इसमें 14 से 15 विषय-आधारित गैलरी बनाई गई हैं, जिनमें बस्तर का घोटुल संस्थान, पारंपरिक कृषि, शिकार, चिकित्सा पद्धति, लोकनृत्य और रीतियां (जैसे नवाखानी और उरिदखानी) को दर्शाया गया है। यह संग्रहालय हलबा विद्रोह, परलकोट विद्रोह, भूमकाल आंदोलन और रानी चो-रिस (महिला नेतृत्व वाला विद्रोह) जैसे ऐतिहासिक आदिवासी संघर्षों और वीरों की गाथाओं को वर्चुअल रियलिटी और वीएफएक्स तकनीक के जरिए जीवंत करता है। संग्रहालय में जनजातियों के परंपरागत वाद्ययंत्रों, आवास एवं घरेलू उपकरण, शिकार उपकरण, उनमें कृषि की परंपरागत तकनीकें एवं उपकरणों का जीवंत प्रदर्शन, उनमें आग जलाने की पद्धतियां, लौह निर्माण, रस्सी निर्माण, फसल मिंजाई (पौधों से बीज अलग करना), कत्था निर्माण, चिवड़ा-लाई निर्माण, मंद आसवन, अन्न कुटाई व पिसाई, तेल प्रसंस्करण हेतु उपयोग में लाने जाने वाले उपकरणों व परंपरागत तकनीकों, सांस्कृतिक विरासत के अंतर्गत अबुझमाड़िया में घोटुल, भुंजिया जनजाति में लाल बंगला, जनजातियों में परम्परागत कला कौशल जैसे बांसकला, काष्ठकला, चित्रकारी, गोदनाकला, शिल्पकला आदि के जीवंत प्रदर्शन किया गया है।

विकसित और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ के निर्माण ओर अग्रसर

छत्तीसगढ़ अपने संसाधनों को आर्थिक अवसरों में बदलने की क्षमता रखता है। राज्य का लक्ष्य किसानों को समृद्ध करना, महिलाओं को सशक्त बनाना और युवाओं को अवसर देना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का संकल्प ले रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 के तहत विकसित और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए अग्रसर है।

बस्तर के जंगलों में मौजूद सुरक्षा कैंप अब दूरदराज के गांव वालों के लिए सेवा और विकास के केंद्र बन रहे हैं। दूरस्थ गांवों में सार्वजनिक परिवहन के लिए ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा‘ शुरू की गई है। बस्तर में सड़क, पुल, मोबाइल नेटवर्क, उचित मूल्य दुकान, स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल और आंगनबाड़ी जैसी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 नागरिकों की संतुष्टि और वास्तविक समाधान ही पैमाना

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 का मूल मंत्र होना चाहिए संवेदनशीलता, समयबद्धता और समाधान। अंतिम लक्ष्य यही है कि नागरिक को यह भरोसा हो कि उसने सरकार तक अपनी बात पहुंचाई है, तो उसकी बात सुनी भी जाएगी और नियमानुसार उसका समाधान भी होगा। शासकीय कार्यालय में आने वाले नागरिक के साथ सम्मान और संवेदनशीलता से व्यवहार हो। उसकी बात सुनी जाए और समयबद्ध जवाब दिया जाए। काम नियमानुसार संभव है तो अनावश्यक विलंब न हो। यदि काम संभव नहीं है तो नागरिक को स्पष्ट कारण बताया जाए। लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की स्थिति न्यूनतम होनी चाहिए। जनता से अच्छा व्यवहार भी अधिकारी-कर्मचारी के प्रदर्शन का महत्वपूर्ण पैमाना होना चाहिए।

26 वर्षों की यह युवा यात्रा इस बात का गवाह है कि छत्तीसगढ़ ने तमाम भौगोलिक और सामाजिक चुनौतियों को पार करते हुए प्रगति के नए आयाम रचे हैं। हालांकि, इस सफर में अभी किसानों की समृद्धि, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसरों के विस्तार और अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं के शत-प्रतिशत लाभ को पहुंचाने की दिशा में निरंतर काम जारी है। ‘विकसित छत्तीसगढ़के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा यह राज्य आने वाले समय में देश के सबसे विकसित और सशक्त राज्यों में अपनी एक अलग मिसाल पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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